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अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी ने फिर नकारा वीआईपी एंगल, जांच में नहीं मिले सबूत

अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी ने फिर नकारा वीआईपी एंगल, जांच में नहीं मिले सबूत

देहरादून- अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में किसी भी वीआईपी की संलिप्तता सामने नहीं आई है। मामले की जांच कर चुकी एसआईटी के सदस्य और तत्कालीन एसपी देहात हरिद्वार शेखर सुयाल ने शनिवार को मीडिया के सामने जांच से जुड़े अहम तथ्यों को रखा।

शेखर सुयाल ने बताया कि शुरुआती दौर में एक व्यक्ति की पहचान जरूर की गई थी, जिसे कथित तौर पर वीआईपी बताया जा रहा था, लेकिन जांच के दौरान उसके खिलाफ कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे उसे इस हत्याकांड से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की गई।

उन्होंने बताया कि घटना के बाद यह बात तेजी से फैली थी कि रिजॉर्ट में किसी खास व्यक्ति के आने की तैयारी थी और उसे विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था। जब उसने इसका विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि उस समय मामला गुमशुदगी का था और जांच एक ब्लाइंड केस के रूप में शुरू हुई थी। एसआईटी के सक्रिय होने के बाद महज पांच घंटे के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसआईटी को अंकिता और उसके मित्र के बीच हुई चैट में ‘वीआईपी’ शब्द का जिक्र मिला था, जिसके बाद इस पहलू की गंभीरता से जांच की गई। अंकिता के मित्र पुष्प समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। रिजॉर्ट कर्मचारियों, दोस्तों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर एक संदिग्ध का स्केच तैयार कराया गया, जिसकी पहचान नोएडा निवासी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान के रूप में हुई।

जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र घटना से पहले रिजॉर्ट आया था और अंकिता के मित्र ने उसकी पहचान भी की थी। एसआईटी ने धर्मेंद्र को जांच में शामिल कर उसकी आवाजाही, संपर्क और रिजॉर्ट आने के उद्देश्य की पूरी पड़ताल की। जांच में सामने आया कि वह जमीन खरीद के सिलसिले में क्षेत्र में आया था और एक स्थानीय परिचित उसे भोजन के लिए रिजॉर्ट ले गया था। उसके खिलाफ भी कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिला।

शेखर सुयाल ने यह भी बताया कि तीनों दोषियों ने अपने बयानों में यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अंकिता पर अतिरिक्त सेवाएं देने का दबाव बनाया था, लेकिन किसी वीआईपी के शामिल होने के ठोस प्रमाण जांच में नहीं मिले।

वहीं, अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा फेसबुक लाइव और ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ सहित अन्य लोगों पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने अलग से एक नई एसआईटी का गठन किया है। इस टीम द्वारा मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। उर्मिला सनावर को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित होने को कहा गया है। उसने ऑनलाइन माध्यम से पुलिस सुरक्षा की मांग भी की है, हालांकि अब तक उसका ठोस पता सामने नहीं आ सका है।

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