राजनीति – FYOLI Times https://fyolitimes.com News Portal Thu, 05 Mar 2026 06:49:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://fyolitimes.com/wp-content/uploads/2024/04/cropped-Fyoli-Times-32x32.png राजनीति – FYOLI Times https://fyolitimes.com 32 32 230750028 नागरिकता के नाम पर मतुआ समुदाय को अनिश्चितता और भ्रम में धकेल रही केंद्र सरकार- ममता बनर्जी https://fyolitimes.com/in-the-name-of-citizenship-the-central-government-is-pushing-the-matua-community-into-uncertainty-and-confusion-mamata-banerjee/ Thu, 05 Mar 2026 06:49:18 +0000 https://fyolitimes.com/?p=26229

नागरिकता मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा– पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ लोग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकता के मुद्दे पर केंद्र की नीतियों से मतुआ समुदाय के लोगों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो रही है। मतुआ समुदाय की आध्यात्मिक नेता बिनापानी देवी ‘बरोमा’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से देश में रह रहे लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।

कई पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ समुदाय के लोग
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय के लोग कई पीढ़ियों से भारत में रह रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकता के नाम पर उन्हें अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति में डालने की कोशिश की जा रही है। बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं के जरिए समुदाय को परेशान किया जा रहा है।

अधिकारों से समझौता नहीं करेगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार मतुआ समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ऐसे हर कदम का विरोध करेगी जो बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ होगा।

बरोमा से रहा विशेष जुड़ाव
ममता बनर्जी ने कहा कि बिनापानी देवी के साथ उनका व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंध रहा है और उन्हें उनका मातृस्नेह प्राप्त हुआ था। उन्होंने बरोमा के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर समानता और भाईचारे के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया।

समुदाय के विकास के लिए कई पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मतुआ समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना और उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में हरिचंद-गुरुचंद विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए काम करती रहेगी।

]]>
26229
डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना https://fyolitimes.com/donald-trumps-statement-sparks-political-controversy-congress-targets-central-government/ Sat, 28 Feb 2026 09:08:32 +0000 https://fyolitimes.com/?p=26179

जयराम रमेश ने कहा- ट्रंप का यह रुख पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष समर्थन देने जैसा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक

नई दिल्ली। अमेरिका की राजनीति से जुड़े हालिया बयान ने भारत की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की तारीफ और अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर उसके समर्थन की बात कहे जाने के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर कड़ा हमला बोला है।

कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत की विदेश नीति के लिए झटका बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि ट्रंप का यह रुख पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष समर्थन देने जैसा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की कूटनीति अपेक्षित परिणाम देने में असफल रही है। उनके अनुसार, आर्थिक समझौतों में भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, जबकि अमेरिका को अधिक फायदे मिले हैं। साथ ही, हाल के व्यापारिक फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाना भी इसी असंतुलन को दर्शाता है।

रणनीतिक मोर्चे पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति को मजबूत करने के बजाय, कुछ बयानों और घटनाओं ने भारत-पाकिस्तान को एक ही नजरिये से देखने की धारणा को बढ़ावा दिया है।

यह विवाद उस समय और गहरा गया जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के साथ अपने अच्छे संबंधों का जिक्र किया और वहां के नेतृत्व की सराहना की। इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

]]>
26179
एआई समिट के दौरान यह प्रदर्शन अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत किया गया- संबित पात्रा https://fyolitimes.com/this-demonstration-during-the-ai-summit-was-not-done-suddenly-but-as-per-a-complete-plan-sambit-patra/ Fri, 20 Feb 2026 11:12:46 +0000 https://fyolitimes.com/?p=25937

भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदर्शन पर बवाल, भाजपा ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला 

नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस घटना के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत किया गया था। उनका कहना है कि इसमें शामिल लोग पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी थे, जिन्होंने पहले से रजिस्ट्रेशन कर कार्यक्रम स्थल में प्रवेश लिया और बाद में विरोध प्रदर्शन किया। पात्रा ने दावा किया कि इस पूरी घटना की रणनीति शीर्ष स्तर पर तैयार की गई थी।

भाजपा ने इस घटना को देश की छवि से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधा। पार्टी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। भाजपा के अनुसार, जब देश वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व को प्रदर्शित कर रहा है, तब इस तरह के विरोध से गलत संदेश जाता है।

वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस समय दुनिया भारत की तकनीकी प्रगति को देख रही थी, उस समय इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने वाले कदम उचित नहीं हैं।

पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा इसे देश की छवि से जुड़ा मुद्दा बता रही है, तो वहीं विपक्ष की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है।

]]>
25937
आरएसएस के समर्थन के बिना कमजोर है भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व- प्रियांक खरगे https://fyolitimes.com/bharatiya-janata-partys-existence-is-weak-without-rsss-support-priyank-kharge/ Mon, 16 Feb 2026 06:52:19 +0000 https://fyolitimes.com/?p=25767

कर्नाटक में सियासी घमासान, मंत्री प्रियांक खरगे का आरएसएस पर तीखा हमला

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। मंत्री प्रियांक खरगे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए उसे भारतीय जनता पार्टी की “वैचारिक धुरी” बताया। उन्होंने संघ की फंडिंग, कानूनी हैसियत और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

“भाजपा छाया है, असली ताकत आरएसएस”

खरगे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व संघ के समर्थन के बिना कमजोर पड़ जाता है। उनके मुताबिक, यदि आरएसएस का वैचारिक और सांगठनिक सहयोग न हो, तो भाजपा की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में केवल “छाया” से नहीं, बल्कि असली शक्ति केंद्र से सवाल पूछने की जरूरत है।

फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल

मंत्री ने संघ की आय के स्रोतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “गुरु दक्षिणा” के नाम पर होने वाले चंदे की पारदर्शिता स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं को अपने वित्तीय लेन-देन का हिसाब देना पड़ता है, तो संघ इससे अलग कैसे हो सकता है। खरगे ने कहा कि बिना पंजीकरण और स्पष्ट कानूनी ढांचे के कोई भी संस्था जवाबदेही से बच नहीं सकती।

पंजीकरण और कानून का मुद्दा

खरगे ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संगठन कानून और संविधान के दायरे में आता है या नहीं। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरएसएस खुद को केवल व्यक्तियों का समूह मानता है, तो फिर क्लबों और एसोसिएशनों की तरह उसका पंजीकरण और कर दायित्व क्यों नहीं है।

धार्मिक विमर्श पर टिप्पणी

धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बोलते हुए खरगे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की मूल भावना और आज की व्याख्याओं में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा या विभाजन को बढ़ावा देना किसी भी रूप में उचित नहीं है।

]]> 25767 महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव- बीएमसी समेत 29 निगमों में कल होगा मतदान https://fyolitimes.com/maharashtra-municipal-elections-voting-will-be-held-tomorrow-in-29-corporations-including-the-bmc/ https://fyolitimes.com/maharashtra-municipal-elections-voting-will-be-held-tomorrow-in-29-corporations-including-the-bmc/#respond Wed, 14 Jan 2026 07:41:59 +0000 https://fyolitimes.com/?p=24888

16 जनवरी को आएंगे नतीजे, महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा होगी तय

मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे इंतजार के बाद नगर निकाय चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत राज्य के 29 नगर निगमों में तीन साल की देरी से चुनाव कराए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और राजनीतिक दलों ने भी उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। अब प्रदेश की सियासत की दिशा तय करने वाले इस अहम चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं।

एक चरण में होगा मतदान
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मतदान दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। ग्रेटर मुंबई क्षेत्र में सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक वोट डाले जाएंगे। चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।

नामांकन से लेकर अंतिम सूची तक पूरी प्रक्रिया संपन्न
नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी, जो 30 दिसंबर तक चली। उम्मीदवारों को 2 जनवरी 2026 तक नाम वापस लेने का मौका दिया गया। इसके बाद 3 जनवरी को चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की गई। अब सभी दल पूरी ताकत के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं।

बीएमसी में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता
देश के सबसे बड़े नगर निगम बीएमसी के 227 वार्डों में 1.03 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। महाराष्ट्र के कुल 29 नगर निगमों में बीएमसी का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है, इसलिए यहां का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम है।

गठबंधनों के बीच कड़ा मुकाबला
बीएमसी चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पूरी मजबूती के साथ मैदान में है। इस गठबंधन में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) शामिल हैं। भाजपा 137 सीटों पर जबकि शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, गठबंधन की सहयोगी एनसीपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करते हुए 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस भी मजबूती से चुनावी मैदान में है। कांग्रेस ने 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं और उसे वंचित बहुजन अघाड़ी का समर्थन प्राप्त है, जिसने 42 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। कांग्रेस की सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष भी छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

तीसरे मोर्चे की भी ताकत आजमाइश
तीसरे गठबंधन में शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी (शरद पवार) और मनसे (राज ठाकरे) शामिल हैं। इस गठबंधन में शिवसेना (उद्धव गुट) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एनसीपी 11 सीटों पर मैदान में है। मनसे शेष सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है।

कुल मिलाकर, बीएमसी और अन्य नगर निगमों के ये चुनाव न केवल शहरी शासन की दिशा तय करेंगे, बल्कि महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति पर भी गहरा असर डालने वाले साबित होंगे।

]]>
https://fyolitimes.com/maharashtra-municipal-elections-voting-will-be-held-tomorrow-in-29-corporations-including-the-bmc/feed/ 0 24888
राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ‘डबल इंजन सरकार’ की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल https://fyolitimes.com/rahul-gandhi-launched-a-scathing-attack-on-the-modi-government-questioning-the-functioning-of-the-double-engine-government/ https://fyolitimes.com/rahul-gandhi-launched-a-scathing-attack-on-the-modi-government-questioning-the-functioning-of-the-double-engine-government/#respond Fri, 09 Jan 2026 08:10:26 +0000 https://fyolitimes.com/?p=24717

अंकिता भंडारी केस से उन्नाव तक, राहुल गांधी ने उठाए न्याय के सवाल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और जनहित की अनदेखी के आरोप लगाए।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने देश के विभिन्न हिस्सों में आम लोगों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब, मजदूर और मध्यमवर्ग की समस्याओं को नजरअंदाज कर ‘विकास’ के नाम पर केवल वसूली और सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, भाजपा की राजनीति में ऊपर से नीचे तक अहंकार और भ्रष्टाचार गहराई से समाया हुआ है।

उत्तराखंड से यूपी तक उठाए सवाल
राहुल गांधी ने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला है, लेकिन आज भी यह सवाल बना हुआ है कि सत्ता का संरक्षण किसे बचा रहा है और कानून सबके लिए समान कब होगा। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन्नाव कांड का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता के प्रभाव में अपराधियों को बचाने की कोशिशें होती रही हैं और पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।

पानी, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर निशाना
राहुल गांधी ने इंदौर समेत कई राज्यों में दूषित पानी से हो रही मौतों और बीमारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में भी काले और जहरीले पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। इसके अलावा राजस्थान की अरावली पर्वतमाला का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ और जंगल काटे जा रहे हैं।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने सरकारी अस्पतालों, स्कूलों और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौतें, सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था, स्कूलों की गिरती इमारतें, पुल और सड़क हादसे महज लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं के बाद सरकार की प्रतिक्रिया केवल औपचारिकताओं तक सीमित रह जाती है।

अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा कि भाजपा का ‘डबल इंजन’ आम जनता के लिए नहीं बल्कि चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए चल रहा है और यह सरकार विकास नहीं, बल्कि तबाही की रफ्तार बन चुकी है।

]]>
https://fyolitimes.com/rahul-gandhi-launched-a-scathing-attack-on-the-modi-government-questioning-the-functioning-of-the-double-engine-government/feed/ 0 24717
नगर निकायों पर कब्जा हुआ तो मराठी मानूस होगा कमजोर- राज ठाकरे https://fyolitimes.com/if-municipal-bodies-are-taken-over-the-marathi-people-will-become-weaker-raj-thackeray/ https://fyolitimes.com/if-municipal-bodies-are-taken-over-the-marathi-people-will-become-weaker-raj-thackeray/#respond Thu, 08 Jan 2026 08:26:46 +0000 https://fyolitimes.com/?p=24684

राज ठाकरे का बीजेपी पर बड़ा हमला, मुंबई को लेकर जताई साजिश की आशंका

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोलते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की सोच रखने वाली ताकतें आज सत्ता में हैं और यदि नगर निकायों पर भी उनका नियंत्रण हो गया, तो मराठी मानूस के अधिकार और अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।

राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का संयुक्त साक्षात्कार का पहला भाग गुरुवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ। साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि दोनों चचेरे भाई किसी राजनीतिक मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से एक मंच पर आए हैं।

नगर निकायों पर नियंत्रण को बताया अहम
साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले लोग अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने अलग राजनीतिक और निर्वाचन क्षेत्र भी बना रहे हैं। उन्होंने इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की पुरानी सोच से जोड़ते हुए कहा कि यह घाव आज भी भरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौर जैसे बनते जा रहे हैं।

राज ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि यदि भाजपा नगर निगमों पर नियंत्रण कर लेती है, तो मराठी मानूस के पास अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए बहुत कम विकल्प बचेंगे। उन्होंने मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, मीरा-भायंदर, कल्याण-डोंबिवली और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख शहरों के नगर निकायों पर नियंत्रण को जरूरी बताया।

राज्य सरकार पर उद्धव ठाकरे का हमला
उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार की विकास नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा विकास की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह “बिना योजना का विकास” है, जो प्रगति के बजाय नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि वह क्या चाहती है और सत्ता में बैठे लोग मुंबई और मराठी जनता से कटे हुए हैं।

मादक पदार्थों के मुद्दे पर भी सवाल
राज ठाकरे ने राज्य में बढ़ते मादक पदार्थों के खतरे को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़ गई है और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है। साथ ही उन्होंने राजनीति में धन के बढ़ते प्रभाव और नशे के प्रसार के बीच संबंध की जांच की जरूरत पर जोर दिया।

]]>
https://fyolitimes.com/if-municipal-bodies-are-taken-over-the-marathi-people-will-become-weaker-raj-thackeray/feed/ 0 24684
वन संरक्षण कानून में किए गए संशोधनों से कमजोर होगी पर्यावरण संरक्षण की नीति- जयराम रमेश https://fyolitimes.com/the-amendments-made-to-the-forest-conservation-act-will-weaken-environmental-protection-policies-jairam-ramesh/ https://fyolitimes.com/the-amendments-made-to-the-forest-conservation-act-will-weaken-environmental-protection-policies-jairam-ramesh/#respond Wed, 07 Jan 2026 08:01:49 +0000 https://fyolitimes.com/?p=24645

वन संरक्षण कानून संशोधन पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

नई दिल्ली। कांग्रेस ने वन संरक्षण कानून में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि इन बदलावों के जरिए देश में वन प्रबंधन को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो पर्यावरण सुरक्षा और पारंपरिक वन नीति के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2 जनवरी को जारी एक सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के फैसलों से जंगलों के संरक्षण की मूल भावना कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2023 में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में किए गए संशोधन संसद में जल्दबाजी में पारित कराए गए थे।

जयराम रमेश के अनुसार, संशोधन के तहत न केवल कानून का नाम बदलकर वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम किया गया, बल्कि जंगलों के संचालन और प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों में भी बड़े बदलाव किए गए। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस ने चेताया था कि इन संशोधनों से निजी संस्थाओं के लिए जंगलों में प्रवेश का रास्ता खुलेगा और अब मंत्रालय का ताजा सर्कुलर उसी दिशा में संकेत दे रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि मौजूदा कदम केवल शुरुआत है और आने वाले समय में इससे जंगलों के व्यावसायिक इस्तेमाल को और बढ़ावा मिल सकता है। पार्टी का आरोप है कि इससे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के हितों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

मंत्रालय के सर्कुलर के मुताबिक, यदि राज्य सरकारें किसी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था के साथ मिलकर प्राकृतिक पुनरुत्पादन, वृक्षारोपण या वन प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां संचालित करती हैं, तो इन्हें वन गतिविधि माना जाएगा। ऐसे मामलों में प्रतिपूरक वनीकरण और नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) के भुगतान जैसी शर्तें लागू नहीं होंगी। इसके साथ ही राज्यों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे इन गतिविधियों से होने वाले राजस्व के बंटवारे का ढांचा स्वयं तय करें।

कांग्रेस का कहना है कि इन प्रावधानों से जंगलों के निजी और व्यावसायिक प्रबंधन की राह आसान हो गई है, जिस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

]]>
https://fyolitimes.com/the-amendments-made-to-the-forest-conservation-act-will-weaken-environmental-protection-policies-jairam-ramesh/feed/ 0 24645
भारत-पाक मध्यस्थता के चीनी दावे पर कांग्रेस का हमला, सरकार से मांगा जवाब https://fyolitimes.com/congress-attacks-chinas-claim-of-mediating-between-india-and-pakistan-demands-an-answer-from-the-government/ https://fyolitimes.com/congress-attacks-chinas-claim-of-mediating-between-india-and-pakistan-demands-an-answer-from-the-government/#respond Wed, 31 Dec 2025 09:59:09 +0000 https://fyolitimes.com/?p=24434

जयराम रमेश बोले—भारत-पाक तनाव पर चीन की मध्यस्थता का दावा चिंताजनक

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने को लेकर चीन द्वारा किए गए मध्यस्थता के दावे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इन बयानों को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए केंद्र सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी देश की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करती है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में स्थिति साफ करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश, जो खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है, उसके द्वारा भारत-पाक संबंधों में मध्यस्थता का दावा करना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का सवाल

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में भूमिका निभाई थी। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अब तक इन दावों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। अब चीन के विदेश मंत्री द्वारा इसी तरह का बयान सामने आने से स्थिति और गंभीर हो गई है।

कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि चार जुलाई 2025 को भारतीय सेना के उप प्रमुख राहुल सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत को चीन की ओर से रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में चीन द्वारा मध्यस्थता का दावा कई सवाल खड़े करता है।

ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका पर उठे सवाल

कांग्रेस ने कहा कि चीन की पाकिस्तान के प्रति झुकी हुई नीति जगजाहिर है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में उसकी भूमिका का दावा न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि यह देशवासियों को दिए गए भरोसे के भी खिलाफ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को हल्के में लेने जैसा है।

जयराम रमेश ने भारत-चीन संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 में चीन को लेकर दिए गए बयानों से भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत का व्यापार घाटा बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे हालात में यह जानना जरूरी है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में चीन की कथित भूमिका क्या थी।

क्या है चीन का दावा

गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना चीन की इस साल की कूटनीतिक सफलताओं में शामिल है। इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हालात दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत से सुलझाए गए थे। नई दिल्ली का स्पष्ट मत है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।

]]>
https://fyolitimes.com/congress-attacks-chinas-claim-of-mediating-between-india-and-pakistan-demands-an-answer-from-the-government/feed/ 0 24434
पहाड़ियों की परिभाषा बदलने से अरावली का संरक्षण प्रभावित नहीं होगा- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव https://fyolitimes.com/changing-the-definition-of-hills-will-not-affect-the-conservation-of-the-aravalli-range-union-minister-bhupender-yadav/ https://fyolitimes.com/changing-the-definition-of-hills-will-not-affect-the-conservation-of-the-aravalli-range-union-minister-bhupender-yadav/#respond Thu, 25 Dec 2025 11:01:58 +0000 https://fyolitimes.com/?p=24268

अरावली विवाद पर भूपेंद्र यादव का पलटवार, कांग्रेस के आरोप किए खारिज

नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे सियासी विवाद के बीच केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से अरावली का कोई हिस्सा संरक्षण से बाहर नहीं होगा और कांग्रेस द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम तथ्यों से परे है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर इसलिए असहज है क्योंकि केंद्र सरकार ने गुजरात से लेकर दिल्ली तक पूरी अरावली पर्वतमाला में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी वैज्ञानिक या आधिकारिक अध्ययन में यह साबित नहीं होता कि नई परिभाषा से अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को नुकसान पहुंचेगा।

दरअसल, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि पर्वतीय श्रृंखलाओं की परिभाषा में बदलाव से अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर चला जाएगा, जिससे खनन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के किसी भी अध्ययन में ऐसे दावों की पुष्टि नहीं होती है।

भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर विपक्ष पर्यावरण संरक्षण को लेकर वास्तव में गंभीर होता, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि अरावली क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान किसके शासनकाल में हुआ। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि वे अपने ही दल के वरिष्ठ नेताओं से अरावली के क्षरण को लेकर जवाब क्यों नहीं मांगते।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अरावली पर्वतमाला को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान इस क्षेत्र में अवैध खनन और अंधाधुंध गतिविधियों से भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब की जा रही है।

गौरतलब है कि हाल ही में पहाड़ियों की नई परिभाषा तय की गई है, जिसके अनुसार किसी क्षेत्र को पहाड़ी तब माना जाएगा जब उसकी ऊंचाई आसपास के भूभाग से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। वहीं, अरावली पर्वतमाला को दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया है, जो 500 मीटर के दायरे में स्थित हों। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी करते हुए अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है।

]]>
https://fyolitimes.com/changing-the-definition-of-hills-will-not-affect-the-conservation-of-the-aravalli-range-union-minister-bhupender-yadav/feed/ 0 24268