lyfstyle – FYOLI Times https://fyolitimes.com News Portal Tue, 31 Mar 2026 08:13:39 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://fyolitimes.com/wp-content/uploads/2024/04/cropped-Fyoli-Times-32x32.png lyfstyle – FYOLI Times https://fyolitimes.com 32 32 230750028 गर्मी में क्यों फायदेमंद है दही- भुना जीरा, आइये जानते हैं क्या कहते है स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://fyolitimes.com/why-is-curd-with-roasted-cumin-beneficial-in-summer-lets-find-out-what-health-experts-have-to-say/ Tue, 31 Mar 2026 08:13:39 +0000 https://fyolitimes.com/?p=27017

गर्मी के मौसम में खानपान को लेकर लोग हल्के और ठंडक देने वाले विकल्प तलाशते हैं। ऐसे में पारंपरिक घरेलू नुस्खा—दही में भुना जीरा मिलाकर खाने की आदत—एक बार फिर चर्चा में है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सरल संयोजन न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत के लिए भी कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है।

आमतौर पर लोग इसे सुबह या दोपहर के भोजन के साथ लेना पसंद करते हैं। दही और भुना जीरा का यह मिश्रण भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होता आ रहा है और अब इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है।

सबसे बड़ा फायदा पाचन तंत्र पर देखने को मिलता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स जहां आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, वहीं भुना जीरा गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट संबंधी परेशानियों में राहत मिलती है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में भी यह मिश्रण सहायक माना जाता है। नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, जिससे मौसमी संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है।

वजन नियंत्रित रखने के लिहाज से भी दही और भुना जीरा उपयोगी माने जाते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं, जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।

इसके अलावा दही में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, जबकि यह त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सलाह पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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बार-बार थकान और सुन्नपन को न करें नजरअंदाज, हो सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस की समस्या https://fyolitimes.com/do-not-ignore-recurring-fatigue-and-numbness-it-could-be-a-sign-of-multiple-sclerosis/ Sat, 28 Mar 2026 06:57:49 +0000 https://fyolitimes.com/?p=26951

आज की बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते तनाव का असर सिर्फ सामान्य बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटोइम्यून डिजीज के मामलों में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी मल्टीपल स्क्लेरोसिस है, जो धीरे-धीरे शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को चुनौतीपूर्ण बना देती है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक क्रॉनिक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही नसों की सुरक्षा करने वाली मायलिन परत पर हमला कर देती है। यह परत दिमाग से शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक संदेश पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है। जब यह क्षतिग्रस्त होती है, तो शरीर के सिग्नल सिस्टम में गड़बड़ी आने लगती है, जिससे कई तरह के न्यूरोलॉजिकल लक्षण सामने आते हैं।

इस बीमारी के कारण व्यक्ति को थकान, शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन, नजर कमजोर होना या डबल विजन, मांसपेशियों में कमजोरी और संतुलन बनाने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में मरीजों को याददाश्त में कमी और ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत होती है। इसके अलावा मूत्र से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी आमतौर पर 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में अधिक पाई जाती है और महिलाओं में इसका खतरा पुरुषों की तुलना में ज्यादा होता है। हालांकि इसके सटीक कारण अब तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन परिवार में पहले से इस बीमारी का होना, विटामिन डी की कमी, धूम्रपान और कुछ वायरल संक्रमण इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस का अभी तक कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही समय पर पहचान और उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए दवाओं के साथ-साथ डिजीज मॉडिफाइंग थेरेपी का उपयोग किया जाता है, जो इम्यून सिस्टम की असामान्य गतिविधि को कम करने में मदद करती है।

इसके अलावा, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, विटामिन डी का सही स्तर बनाए रखना और धूम्रपान से दूरी इस बीमारी के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। फिजियोथेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी थेरेपी भी मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है।

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रूखे और कमजोर बालों के लिए आयुर्वेदिक विंटर हेयर ऑयल, जानें फायदे और उपयोग का तरीका https://fyolitimes.com/ayurvedic-winter-hair-oil-for-dry-and-weak-hair-learn-about-its-benefits-and-how-to-use-it/ https://fyolitimes.com/ayurvedic-winter-hair-oil-for-dry-and-weak-hair-learn-about-its-benefits-and-how-to-use-it/#respond Fri, 12 Dec 2025 10:11:02 +0000 https://fyolitimes.com/?p=23843

सर्दियों के मौसम में बालों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ती है। तापमान गिरने के कारण बाल अक्सर रूखे, बेजान और कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ पारंपरिक तरीकों से तैयार किए गए पोषक तेलों के इस्तेमाल को बेहद प्रभावी मानते हैं, क्योंकि इस मौसम में स्कैल्प और बाल पोषक तत्वों को तेजी से सोखते हैं।

इसी के मद्देनज़र पारंपरिक और आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित एक विशेष विंटर हेयर ऑयल इन दिनों चर्चा में है। यह तेल बालों की जड़ों को पोषण देने के साथ-साथ बालों की ग्रोथ बढ़ाने, मजबूती लाने और प्राकृतिक चमक लौटाने में मदद करता है।

कौन-कौन सी सामग्री है असरदार और क्यों?

नारियल तेल – बालों को गहराई से पोषण देता है और प्रोटीन लॉस से बचाता है।

सरसों तेल – ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर हेयर फॉलिकल्स को मजबूत करता है।

कैस्टर ऑयल – रिसिनोलिक एसिड की मौजूदगी इसे हेयर ग्रोथ के लिए बेहद फायदेमंद बनाती है।

आंवला – विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट बालों को मजबूत और शाइनी बनाते हैं।

कढ़ी पत्ता – बाल झड़ना कम करता है और समय से पहले सफेद होने की समस्या घटाता है।

प्याज – सल्फर बालों की जड़ों को रिवाइटलाइज करता है और हेयर फॉल रोकता है।

मेथी दाना – प्रोटीन से भरपूर, डैंड्रफ और बाल टूटने की समस्या कम करता है।

कलौंजी – एंटीफंगल गुण स्कैल्प इंफेक्शन से बचाव करते हैं।

कैसे तैयार करें यह स्पेशल हेयर ऑयल?

रिपोर्ट के अनुसार, तेल तैयार करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:

100 मिली नारियल तेल, 50 मिली सरसों तेल और 50 मिली कैस्टर ऑयल को बर्तन में धीमी आंच पर गर्म करें।

इसमें 2 चम्मच मेथी दाना, 1 चम्मच कलौंजी, 10–12 कढ़ी पत्ते और बारीक कटा एक छोटा प्याज डालें।

मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक प्याज हल्का सुनहरा न हो जाए।

इसके बाद 2 चम्मच सूखा आंवला पाउडर डालकर 2 मिनट और पकाएं।

ठंडा होने पर मिश्रण को छानकर साफ बोतल में भर लें।

इसे ठंडी जगह पर स्टोर करें।

कैसे करें इस्तेमाल?

सप्ताह में 2–3 बार तेल लगाएं।

रात को हल्के हाथों से स्कैल्प में मसाज कर पूरे बालों में लगाएं।

सुबह गुनगुने पानी और माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें।

नियमित उपयोग से लगभग एक महीने में बालों की ग्रोथ, मजबूती और घनापन बढ़ने के परिणाम देखे जा सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

स्कैल्प सेंसिटिव हो तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें।

गर्म तेल को सीधे सिर पर न लगाएं, ठंडा होने के बाद ही उपयोग करें।

एलर्जी वाले लोग डॉक्टर से सलाह लेकर ही इस्तेमाल करें।

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भारत में बढ़ रहा प्री-डायबिटीज का खतरा, थोड़ी सी लापरवाही टाइप-2 डायबिटीज की तरफ धकेल रही https://fyolitimes.com/the-risk-of-pre-diabetes-is-increasing-in-india-and-even-a-little-carelessness-can-lead-to-type-2-diabetes/ https://fyolitimes.com/the-risk-of-pre-diabetes-is-increasing-in-india-and-even-a-little-carelessness-can-lead-to-type-2-diabetes/#respond Mon, 10 Nov 2025 11:49:06 +0000 https://fyolitimes.com/?p=22781

14 नवंबर को दुनिया भर में वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, बल्कि “प्री-डायबिटीज” भी बेहद तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि देश में लाखों लोग इस स्टेज में पहुंच चुके हैं, लेकिन आधे से ज्यादा लोगों को यह एहसास भी नहीं कि उनका ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर जा चुका है और उनका शरीर इंसुलिन के प्रति धीरे-धीरे रेजिस्टेंट होता जा रहा है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है —
प्री-डायबिटीज वह स्थिति है जहां यदि समय रहते जीवनशैली में बदलाव न किया गया तो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अगले कुछ सालों के अंदर ही सामने आ जाता है।

क्यों माना जाता है प्री-डायबिटीज को ‘रिस्क अलर्ट’?

डॉक्टर बताते हैं कि इस अवस्था में ब्लड शुगर बढ़ना शुरू हो चुका होता है और यही चुपचाप शरीर के अंगों पर असर डालना शुरू कर देता है। यही वजह है कि इसे “साइलेंट स्टेज” कहा जाता है। यही स्टेज आगे जाकर हार्ट डिसीज़, स्ट्रोक, किडनी डैमेज की नींव रखती है।

किन लोगों में बढ़ चुका है खतरा?

जिनका वजन अधिक है, विशेषकर पेट पर

जिनकी लाइफस्टाइल में फिजिकल एक्टिविटी कम है

जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है

हाई BP / हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज

PCOS वाली महिलाएं

अक्सर लक्षण नहीं दिखते — फिर भी इन संकेतों पर ध्यान दें

गर्दन / बगल की त्वचा का काला पड़ना

जल्दी थकान होना

प्यास ज्यादा लगना

बार-बार पेशाब आना

विजन ब्लर होना

ऐसे संकेत मिलें तो डॉक्टर से ब्लड टेस्ट — Fasting Plasma Glucose या Oral Glucose Tolerance Test — जरूर करवाएं

कैसे बचाव हो सकता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक प्री-डायबिटीज को रिवर्स करना संभव है।
तीन बदलाव सबसे प्रभावी माने जा रहे हैं—

वजन में 5%–7% की कमी

रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक/कसरत

रिफाइंड कार्ब्स (चीनी, मैदा, प्रोसेस्ड) घटाएं और फाइबर व प्रोटीन बढ़ाएं

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दिवाली के स्वाद के बाद पेट हो गया है भारी? अपनाएं ये 4 घरेलू नुस्खे, मिलेगी राहत https://fyolitimes.com/feeling-heavy-in-your-stomach-after-the-diwali-feast-try-these-4-home-remedies-for-relief/ https://fyolitimes.com/feeling-heavy-in-your-stomach-after-the-diwali-feast-try-these-4-home-remedies-for-relief/#respond Tue, 21 Oct 2025 12:00:51 +0000 https://fyolitimes.com/?p=22180

दीपावली का त्योहार आते ही घर-घर में मिठाइयों और लजीज व्यंजनों की खुशबू फैल जाती है। गुलाब जामुन, गुजिया, कचौरी और तरह-तरह के तले पकवानों से टेबल सज जाती है। लेकिन अक्सर स्वाद के चक्कर में हम ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं। नतीजा — पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी और कभी-कभी फूड पॉइजनिंग जैसी दिक्कतें।

अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो परेशान न हों। रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजें ही आपकी बड़ी मदद कर सकती हैं। ये घरेलू नुस्खे पाचन तंत्र को आराम देते हैं, एसिडिटी को शांत करते हैं और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं ऐसे चार असरदार उपाय, जो दिवाली के बाद आपकी सेहत को फिर से दुरुस्त कर देंगे।

जीरा पानी — पेट का नैचुरल डिटॉक्स

जीरा न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं। यह पेट की गैस और अपच में तुरंत राहत देता है।

कैसे बनाएं:
एक चम्मच जीरा एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए, तो उसे छानकर गुनगुना पी लें। यह मिश्रण पेट की सूजन कम करता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

हींग और मेथी का पानी — फूड पॉइजनिंग में रामबाण

अगर ज्यादा तला-भुना या बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग की समस्या हो गई है, तो यह नुस्खा बेहद असरदार है।

कैसे बनाएं:
एक चुटकी हींग, आधा चम्मच मेथी दाना और चुटकी भर सेंधा नमक एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाएं। इसे धीरे-धीरे पीएं।
हींग गैस और दर्द में राहत देती है, जबकि मेथी दाना आंतों को साफ करके हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है।

नींबू पानी — एसिडिटी से तुरंत आराम

त्योहारों में तैलीय खाना खाने से पेट का पीएच असंतुलित हो जाता है। नींबू पानी उसे फिर से संतुलित करने में मदद करता है।

कैसे लें:
एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ें और थोड़ा सेंधा नमक मिलाएं। इसे सुबह खाली पेट या दिन में दो बार पी सकते हैं। इससे एसिडिटी दूर होती है और शरीर डिटॉक्स होता है।

छाछ — सबसे आसान पाचन ड्रिंक

भारी खाना खाने के बाद छाछ पीना पाचन के लिए सबसे आसान उपाय है।

कैसे तैयार करें:
एक गिलास सादी छाछ में थोड़ा भुना हुआ जीरा और काला नमक डालें। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं और पेट की गर्मी कम करते हैं।

ध्यान रखें

त्योहारों के मौसम में स्वाद का मज़ा जरूर लें, लेकिन संयम से। भोजन के बाद थोड़ा टहलना, पानी पीते रहना और हल्के घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकता है।

(साभार)

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प्रोटीन या खाली कैलोरी? जानिए सोया चाप के बारे में ये जरूरी जानकारी https://fyolitimes.com/protein-or-empty-calories-learn-this-important-information-about-soya-chaap/ https://fyolitimes.com/protein-or-empty-calories-learn-this-important-information-about-soya-chaap/#respond Wed, 01 Oct 2025 08:59:37 +0000 https://fyolitimes.com/?p=21609

आजकल बाजार और रेस्टोरेंट में सोया चाप का क्रेज बढ़ता जा रहा है। शाकाहारी और जिम जाने वाले लोग इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत मानकर बड़ी चाव से खाते हैं। स्ट्रीट फूड हो या होम रेसिपी, हर जगह सोया चाप की लोकप्रियता बढ़ रही है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्यादातर बाजार में मिलने वाला सोया चाप आपके शरीर के लिए उतना फायदेमंद नहीं हो सकता, जितना आप सोचते हैं? असल में कई बार इसे बनाने में सोया की जगह मैदा और अन्य अनहेल्दी सामग्री ज्यादा मिलाई जाती है।

सोया चाप में प्रोटीन की मात्रा कितनी है?
सोया प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, यह सच है। लेकिन बाजार में तैयार होने वाले सोया चाप में अक्सर लागत कम करने के लिए ज्यादा मैदा और मिलावट होती है। कई जगहों पर मैदे की मात्रा सोया से भी ज्यादा होती है। इसलिए, जो आप प्रोटीन की उम्मीद में खा रहे हैं, वह असल में कार्ब्स और खाली कैलोरी हो सकती है।

मैदा के नुकसान
मैदा एक रिफाइंड कार्ब है, जिसमें फाइबर नहीं होता। यह जल्दी पचता है और ब्लड शुगर बढ़ा देता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह खतरनाक हो सकता है और स्वस्थ लोगों में भी वजन बढ़ाने और सूजन जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।

पकाने का तरीका और भी जोखिम भरा
सोया चाप को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसे अक्सर डीप फ्राई किया जाता है और फिर भारी ग्रेवी में पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में अनहेल्दी फैट और कैलोरी बढ़ जाती है, जिससे यह हेल्दी विकल्प के बजाय नुकसानदेह बन जाता है।

स्वस्थ विकल्प
अगर आप प्रोटीन लेना चाहते हैं, तो सोया चाप पर पूरी तरह निर्भर न रहें। इसके बजाय पनीर, टोफू, दालें, छोले, राजमा और सोयाबीन जैसे शुद्ध प्रोटीन स्रोत अपनाएं। ये विकल्प सेहत और पोषण दोनों के लिए बेहतर हैं।

(साभार)

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युवाओं में क्यों बढ़ रहा लिवर रोगों का खतरा, आइये जानते हैं इसके कारण https://fyolitimes.com/why-is-the-risk-of-liver-disease-increasing-among-the-youth-let-us-know-the-reasons-for-this/ https://fyolitimes.com/why-is-the-risk-of-liver-disease-increasing-among-the-youth-let-us-know-the-reasons-for-this/#respond Mon, 29 Sep 2025 10:59:25 +0000 https://fyolitimes.com/?p=21547

हम अक्सर अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और अनजाने में ही अपने शरीर के सबसे अहम अंग – लिवर – के दुश्मन बन बैठते हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और नशे की लत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब न सिर्फ बुजुर्ग बल्कि युवा भी तेजी से क्रॉनिक बीमारियों और लिवर रोगों का शिकार हो रहे हैं। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दशकों में यह समस्या देश की बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकती है, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि हर साल करीब 20 लाख लोग लिवर से जुड़ी बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। हृदय रोग और कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच अब लिवर रोगों की महामारी की चेतावनी और चिंता बढ़ा रही है।

भारत में भी स्थिति गंभीर है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज (NAFLD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो करीब 38% वयस्कों और 35% बच्चों को प्रभावित कर रहा है। मोटापा, जंक फूड और गतिहीन जीवनशैली इसके बड़े कारण हैं। लेकिन सबसे खतरनाक वजह मानी जा रही है – अल्कोहल। डॉक्टरों का मानना है कि शराब की थोड़ी मात्रा भी लिवर के लिए घातक साबित हो सकती है।

शोधों में पाया गया है कि लगातार शराब पीना लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे सिरोसिस, फाइब्रोसिस और लिवर कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अल्कोहल को लिवर रोगों का सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी हाल ही में कहा था कि देश में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर डिजीज से ग्रसित हो सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर सलाह देते हैं – शराब से दूरी और जीवनशैली में सुधार ही लिवर को स्वस्थ बनाए रखने का सबसे कारगर तरीका है।

संक्षेप में, अगर हमें आने वाले सालों में लिवर रोगों की महामारी से बचना है, तो अभी से सतर्क होना होगा। संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और नशे से परहेज ही इस खतरे को टालने का एकमात्र उपाय है।

(साभार)

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कंप्यूटर, मोबाइल की ब्लू लाइट का खतरा- समय से पहले ही कर सकता है आपको बूढा https://fyolitimes.com/the-dangers-of-blue-light-from-computers-and-mobile-phones-can-make-you-age-prematurely/ https://fyolitimes.com/the-dangers-of-blue-light-from-computers-and-mobile-phones-can-make-you-age-prematurely/#respond Thu, 18 Sep 2025 09:50:47 +0000 https://fyolitimes.com/?p=21148

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में मोबाइल और कंप्यूटर हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन क्लास या फिर दोस्तों से बातचीत—हर जगह स्क्रीन हमारे साथ रहती है। लेकिन यह सुविधा धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। खासकर गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) हमारी आंखों, दिमाग और त्वचा पर गहरा असर डाल रही है।

कई शोध बताते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए रखने से न सिर्फ नींद खराब होती है, बल्कि यह समय से पहले बुढ़ापा (Premature Ageing) भी ला सकती है। लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से थकान, हार्मोनल असंतुलन, त्वचा पर झुर्रियां और यहां तक कि मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग घंटों कमरे या ऑफिस के अंदर काम करते हैं और बाहर धूप या प्राकृतिक रोशनी से दूर रहते हैं, उनके शरीर में विटामिन-डी की कमी और मोटापे जैसी परेशानियां जल्दी सामने आती हैं। अगर इसके साथ ब्लू लाइट का असर जुड़ जाए तो स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ जाते हैं।

अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) प्रभावित होती है। यह न सिर्फ नींद और ऊर्जा स्तर बिगाड़ती है, बल्कि कोशिकाओं की कार्यक्षमता भी कम करती है। पशुओं पर हुए इस रिसर्च में स्पष्ट हुआ कि ब्लू लाइट ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर दिया और मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाया।

नींद पर असर, मोटापे का खतरा और त्वचा की चमक खोना—ये सब ब्लू लाइट की वजह से होने वाले दुष्प्रभाव हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन से निकलने वाली यह रोशनी त्वचा पर झुर्रियां, दाग-धब्बे और समय से पहले बुढ़ापा लाने में अहम भूमिका निभाती है।

अगर आप भी दिनभर मोबाइल और लैपटॉप में डूबे रहते हैं, तो अब वक्त आ गया है कि सावधान हो जाएं और स्क्रीन टाइम को कम करें। प्राकृतिक रोशनी और बाहर की ताज़ी हवा आपके स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए बेहद जरूरी है।

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क्या सच में हेलमेट पहनने से झड़ते हैं बाल? जानिए हकीकत https://fyolitimes.com/does-wearing-a-helmet-really-cause-hair-loss-find-out-the-truth/ https://fyolitimes.com/does-wearing-a-helmet-really-cause-hair-loss-find-out-the-truth/#respond Wed, 17 Sep 2025 10:40:31 +0000 https://fyolitimes.com/?p=21112

आज के समय में बालों का झड़ना आम समस्या बन चुकी है। खराब खान-पान, तनाव और बिगड़ी हुई दिनचर्या इसके बड़े कारण हैं। लेकिन अक्सर लोग यह भी कहते हैं कि हेलमेट पहनने की वजह से बाल झड़ते हैं या गंजापन आता है। सुनने में यह अजीब लगता है कि जो हेलमेट सिर को सुरक्षा देता है, वही आपके बालों का दुश्मन बन सकता है। तो आखिर इस दावे में कितनी सच्चाई है? आइए जानते हैं।

क्या सच में हेलमेट से बाल झड़ते हैं?

हकीकत यह है कि हेलमेट बाल झड़ने का सीधा कारण नहीं है। बल्कि, हेलमेट पहनने से जुड़ी कुछ आदतें और लापरवाही हेयर फॉल को बढ़ावा दे सकती हैं।

क्यों बढ़ता है हेयर फॉल?

पसीना और गंदगी का जमाव
लंबे समय तक हेलमेट पहनने से सिर में पसीना जम जाता है। इससे बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन हो सकते हैं, जो हेयर फॉल को बढ़ाते हैं।

स्कैल्प को हवा न मिलना
टाइट और बंद हेलमेट स्कैल्प को सांस लेने नहीं देता। इससे बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं।

साफ-सफाई की कमी
धूलभरे या गंदे हेलमेट का इस्तेमाल स्कैल्प पर डैंड्रफ, खुजली और रैशेज का कारण बनता है, जिससे बाल झड़ते हैं।

खराब क्वालिटी की पैडिंग
सस्ते या नकली हेलमेट में लगी खराब फोम स्कैल्प पर एलर्जिक रिएक्शन कर सकती है और हेयर फॉल को बढ़ा देती है।

बालों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

हमेशा अच्छी क्वालिटी और साफ हेलमेट का इस्तेमाल करें।

हेलमेट पहनने से पहले बालों को बचाने के लिए कॉटन का स्कार्फ या सॉफ्ट कैप लगाएं।

समय-समय पर हेलमेट की सफाई करें।

बालों की मजबूती के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और सही हेयर केयर अपनाएं।

लंबे समय तक हेयर फॉल की समस्या हो तो डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

(साभार)

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अथर्व से चैताली तक जाने कुछ अनोखे बेबी नेम्स https://fyolitimes.com/from-atharva-to-chaitali-know-some-unique-baby-names/ https://fyolitimes.com/from-atharva-to-chaitali-know-some-unique-baby-names/#respond Sun, 07 Sep 2025 10:54:43 +0000 https://fyolitimes.com/?p=20775

जब बच्चे के नाम की बात आती है तो माता-पिता अक्सर सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर कौन-सा नाम सबसे बेहतर होगा। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व और भविष्य से भी जुड़ा होता है। इसी वजह से आजकल लोग ऐसे नाम तलाशते हैं जो अनोखे हों, बदलते समय के साथ ट्रेंड में हों और सुनने में भी हटके लगें। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही खास और यूनिक नाम, जो इस समय काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

लड़को के कुछ यूनिक नेम्स 

1. आरव (शांति)

2. अद्वैत  (अनोखा )

3. अथर्व (पवित्र और शुभ)

4. देवांश (दिव्य अंश)

5. एकांश (एकमात्र अंश या पूर्ण)

6. गगन (स्वतंत्रता और दिव्यता का प्रतीक)

7. इन्द्रजीत ( इंद्र को जीतने वाला  )

8. ओजस (जीवन शक्ति या उर्जा )

9. विहान (आशा और नई शुरुआत का प्रतीक )

10. विवान (जीवन से भरपूर)

लड़कियों के कुछ यूनिक नेम्स 

1. आध्या  (माता दुर्गा)

2. अवनि (पृथ्वी)

3. भव्या (माता पार्वती)

4. ईशा (देवी पार्वती)

5. चैताली  (चैत्र के महीने में जन्मी)

6. इनाया (भगवान का उपहार)

7. जानवी (माँ गंगा )

8. कश्वी (प्रकाशमान)

9. लीला (दिव्य खेल)

10. नम्रता (विनयशील)

11. ओमिषा (जन्म और मृत्यु की देवी )

12.रचिता (सृजनकर्ता)

13. त्विषा ( उज्जवल)

हर नाम की अपनी एक पहचान होती है। इसलिए जब भी आप कोई नाम चुनें, तो सोच-समझकर चुनें। साथ ही, अपने बच्चों को जीवन की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करें।  उनमें विनम्रता ज़रूर होनी चाहिए। वे सभी का सम्मान करना और इज़्ज़त देना जानें, यही असली पहचान है।

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