उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हाईवे पर एक बार फिर भू-धंसाव का खतरा गहरा गया है। भटवाड़ी के पापड़गाड क्षेत्र में सड़क पर आई लंबी दरार ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि न केवल गंगोत्री हाईवे की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि पास स्थित क्यार्क गांव भी संभावित खतरे की जद में आ गया है।
भटवाड़ी स्थित पापड़गाड के पास सोमवार को गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक भू-धंसाव के संकेत दिखाई दिए। शुरुआत में सड़क पर हल्की दरार नजर आई, लेकिन कुछ ही घंटों में यह करीब 50 मीटर तक फैल गई। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने कुछ समय के लिए मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान केवल दोपहिया वाहनों को सीमित रूप से गुजरने की अनुमति दी गई।
स्थिति सामान्य बनाने के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने दरारों को अस्थायी रूप से मिट्टी भरकर ठीक किया और बाद में यातायात बहाल कर दिया। हालांकि विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश या भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क फिर धंस सकती है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर बड़े पैमाने पर भू-धंसाव हुआ था, जिसके कारण गंगोत्री हाईवे कई दिनों तक बंद रहा था। इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्यार्क गांव और सड़क दोनों गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पापड़गाड से आने वाले मलबे और बड़े-बड़े बोल्डर मोटर पुल और आसपास के इलाके के लिए भी जोखिम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने भागीरथी नदी के किनारे सुरक्षात्मक कार्य कराने और भू-धंसाव रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग की है।
इस मामले में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए तकनीकी सर्वे कराया जा रहा है। संबंधित एजेंसियों की ओर से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। रिपोर्ट पूरी होने के बाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा और स्थायी संरक्षण कार्य शुरू किए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।

