Breaking News
पूर्व सैनिक कल्याण के लिए संकल्पबद्ध धामी सरकार गणेश जोशी
मुख्य सचिव ने मलिन बस्तीवासियों के पुनर्वास के वर्किंग प्लान पर तत्काल कार्य करने की दी हिदायत
राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने वक्फ संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी की कड़ी आलोचना की
आईपीएल 2025- कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबला आज 
पीएमजीएसवाई के तहत उत्तराखंड में 814 किमी सड़कों का निर्माण
नुसरत भरूचा की आगामी फिल्म ‘छोरी 2’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, 11 अप्रैल को प्राइम वीडियो पर देगी दस्तक  
इस दिन खुलेंगे चारधाम के पहले प्रमुख पड़ाव यमुनोत्री धाम के कपाट
दो बहनों में एक के साथ दुष्कर्म और दूसरी के साथ छेड़खानी के मामले में महिला आयोग सख्त
कहीं आप भी तो नहीं कर रहे अपने खानपान में यह गलतियां, बढ़ सकता है किडनी डैमेज का खतरा 

क्या आपकी भी थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि करने पर फूलने लगती है सांस, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, फेफड़े होंगे मजबूत 

कुछ कदमों पैदल टहलने पर आपकी सांस फूलने लगती है? या सीढ़ियां चढ़ते उतरते समय आप हांफने लगते हैं? अगर थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि करने पर ही आपकी सांस फूलने लगती है या जल्दी हांफने लगते हैं तो यह फेफड़ों की कमजोरी का संकेत हो सकता है। नियमित रूप से कुछ योगासनों का अभ्यास करके आप अपनी लंग्स कैपेसिटी (फेफड़ों की क्षमता) को बढ़ा सकते हैं और सांस संबंधी दिक्कतों से राहत पा सकते हैं। अगर आप इन योगासनों का नियमित अभ्यास करेंगे तो कुछ ही हफ्तों में आपकी सांस फूलने की समस्या में सुधार देखने को मिलेगा और फेफड़े पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम के अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। सांस फूलने की समस्या कम होती है और शरीर ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है। आरामदायक मुद्रा में बैठकर रीढ़ सीधी रखें। फिर दाहिने हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद करें और बाईं नासिका से गहरी सांस लें। अब बाईं नासिका बंद करके दाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह प्रक्रिया दूसरी तरफ से भी दोहराएं। रोज इस प्राणायाम को 5-10 मिनट करें।

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति के अभ्यास के लिए सीधा बैठें और पेट को ढीला छोड़ें। तेजी से नाक से सांस बाहर निकाले और पेट को अंदर करें। यह प्रक्रिया लगातार 50-100 बार करें। कपालभाति प्राणायाम करने से फेफड़ों की सफाई होती है। सांस से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है।

(साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top